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वसंत पंचमी : यश प्राप्तीसाठी करावेत विश्वविजय सरस्वती कवच पाठ

7 वर्षांपूर्वी
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आज 24 जानेवारीला शनिवारी वसंत पंचमीचा उत्सव आहे. या दिवशी देवी सरस्वतीची विशेष पूजा केली जाते. देवी सरस्वती ज्ञान, बुद्धी, कला व संगीताची देवी आहे. देवी सरस्वतीच्या उपासनेने मूर्ख व्यक्तीसुद्धा विद्वान बनू शकतो. विश्वविजय सरस्वती कवचाचे नियमित पाठ केल्यास साधकाला विविध लाभ होतात. विद्यार्थ्यांसाठी हे सरस्वती कवच विशेष लाभदायक आहे.

धर्मशास्त्रानुसार देवी सरस्वतीचे हे कवच धारण करून महर्षी वेदव्यास, ऋषी श्रुंग, भारद्वाज, देवल तसेच जैगीषव्य इ. ऋषींनी सिद्धी प्राप्त केली आहे.

विश्वविजय सरस्वती कवच

श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वत:।
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदावतु।।

ऊं सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्र पातु निरन्तरम्।
ऊं श्रीं ह्रीं भारत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदावतु।।

ऐं ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोवतु।
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदावतु।।

ऊं श्रीं ह्रीं ब्राह्मयै स्वाहेति दन्तपंक्ती: सदावतु।
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदावतु।।

ऊं श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदावतु।
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्ष: सदावतु।।

ऊं ह्रीं विद्यास्वरुपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्।
ऊं ह्रीं ह्रीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदावतु।।

ऊं सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदावतु।
ऊं रागधिष्ठातृदेव्यै सर्वांगं मे सदावतु।।

ऊं सर्वकण्ठवासिन्यै स्वाहा प्राच्यां सदावतु।
ऊं ह्रीं जिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहाग्निदिशि रक्षतु।।

ऊं ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा।
सततं मन्त्रराजोऽयं दक्षिणे मां सदावतु।।

ऊं ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदावतु।
कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु।।

ऊं सदाम्बिकायै स्वाहा वायव्ये मां सदावतु।
ऊं गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेवतु।।

ऊं सर्वशास्त्रवासिन्यै स्वाहैशान्यां सदावतु।
ऊं ह्रीं सर्वपूजितायै स्वाहा चोध्र्वं सदावतु।।

ऐं ह्रीं पुस्तकवासिन्यै स्वाहाधो मां सदावतु।
ऊं ग्रन्थबीजरुपायै स्वाहा मां सर्वतोवतु।।

(ब्र. वै. पु. प्रकृतिखंड 4/73-85)